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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 1: बाल काण्ड
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सर्ग 13: यज्ञ की तैयारी, राजाओं को बुलाने के आदेश एवं उनका सत्कार तथा पत्नियों सहित राजा दशरथ का यज्ञ की दीक्षा लेना
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श्लोक 39
श्लोक
1.13.39
तथा वसिष्ठवचनादृष्यशृंगस्य चोभयो:।
दिवसे शुभनक्षत्रे निर्यातो जगतीपति:॥ ३९॥
अनुवाद
ऋषि वसिष्ठ और ऋष्यश्रृंग की आज्ञा से शुभ दिन राजा दशरथ यज्ञ के लिए महल से निकले ॥39॥
On the orders of sage Vasishtha and Rishya Shringa, on an auspicious day, King Dasharatha left the palace for the yagya. 39॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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