श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 10: अंगदेश में ऋष्यश्रृंग के आने तथा शान्ता के साथ विवाह होने के प्रसंग का विस्तार के साथ वर्णन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.10.2 
रोमपादमुवाचेदं सहामात्य: पुरोहित:।
उपायो निरपायोऽयमस्माभिरभिचिन्तित:॥ २॥
 
 
अनुवाद
"उस समय पुरोहित ने अपने मन्त्रियों सहित राजा रोमपाद से कहा - 'महाराज! हमने एक उपाय सोचा है, जिसके प्रयोग से किसी प्रकार की बाधा आने की सम्भावना नहीं रहती।॥ 2॥
 
"At that time the priest along with his ministers said to King Romapada - 'Maharaj! We have thought of a solution, by using which there is no possibility of any obstacle.॥ 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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