श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य  »  सर्ग 5: रामायण के नवाह श्रवण की विधि, महिमा तथा फल का वर्णन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  0.5.8 
अद्य प्रभृत्यहं राम शृणोमि त्वत्कथामृतम्।
प्रत्यहं पूर्णतामेतु तव राम प्रसादत:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
फिर भगवान से प्रार्थना करें- 'श्रीराम! आज से मैं प्रतिदिन आपकी अमृतमयी कथा सुनूँगा। यह आपकी कृपा से परिपूर्ण हो।'॥8॥
 
Then pray to God- 'Shri Ram! From today onwards I will listen to your nectar-like story every day. May it be filled with your blessings.'॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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