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श्लोक 0.5.8  |
अद्य प्रभृत्यहं राम शृणोमि त्वत्कथामृतम्।
प्रत्यहं पूर्णतामेतु तव राम प्रसादत:॥ ८॥ |
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| अनुवाद |
| फिर भगवान से प्रार्थना करें- 'श्रीराम! आज से मैं प्रतिदिन आपकी अमृतमयी कथा सुनूँगा। यह आपकी कृपा से परिपूर्ण हो।'॥8॥ |
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| Then pray to God- 'Shri Ram! From today onwards I will listen to your nectar-like story every day. May it be filled with your blessings.'॥ 8॥ |
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