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श्लोक 0.5.69  |
यस्त्वेतच्छृणुयाद् वापि पठेद् वा सुसमाहित:।
सर्वपापविनिर्मुक्तो विष्णुलोकं स गच्छति॥ ६९॥ |
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| अनुवाद |
| जो मनुष्य पूर्ण एकाग्रता के साथ रामायण का श्रवण या वाचन करता है, वह सभी पापों से मुक्त होकर भगवान विष्णु के धाम को जाता है। |
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| One who listens to or reads the Ramayana with full concentration becomes free from all sins and goes to Lord Vishnu's abode. 69. |
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इति श्रीस्कन्दपुराणे उत्तरखण्डे नारदसनत्कुमारसंवादे रामायणमाहात्म्ये फलानुकीर्तनं नाम पञ्चमोऽध्याय:॥ ५॥
इस प्रकार श्रीस्कन्दपुराणके उत्तरखण्डमें श्रीनारद-सनत्कुमार-संवादके अन्तर्गत रामायणमाहात्म्यके प्रसंगमें फलका वर्णन नामक पाँचवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ५॥ |
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