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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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सर्ग 5: रामायण के नवाह श्रवण की विधि, महिमा तथा फल का वर्णन
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श्लोक 67
श्लोक
0.5.67
चैत्रे माघे कार्तिके च रामायणकथामृतम्।
नवैरहोभि: श्रोतव्यं रामायणकथामृतम्॥ ६७॥
अनुवाद
चैत्र, माघ और कार्तिक मास में रामायण की अमृतमयी कथा का नवाह परायण सुनना चाहिए।
The Navah Parayan of the nectar-like story of the Ramayana should be heard in the months of Chaitra, Magha and Kartika. 67.
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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