श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य  »  सर्ग 5: रामायण के नवाह श्रवण की विधि, महिमा तथा फल का वर्णन  »  श्लोक 64
 
 
श्लोक  0.5.64 
रामार्पितमिदं पुण्यं काव्यं तु सर्वकामदम्।
भक्त्या शृण्वन्ति विदन्ति तेषां पुण्यफलं शृणु॥ ६४॥
 
 
अनुवाद
श्री राम को समर्पित यह पवित्र काव्य समस्त मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला है। जो मनुष्य इसे भक्तिपूर्वक सुनेंगे और समझेंगे, उन्हें जो पुण्य फल प्राप्त होंगे, उसका वर्णन सुनो। ॥64॥
 
This holy poem dedicated to Shri Ram is the fulfiller of all desires. Listen to the description of the virtuous results that those who listen to and understand it with devotion will receive. ॥ 64॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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