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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य
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सर्ग 5: रामायण के नवाह श्रवण की विधि, महिमा तथा फल का वर्णन
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श्लोक 60-61h
श्लोक
0.5.60-61h
इत्येतद्व: समाख्यातं नारदेन प्रभाषितम्॥ ६०॥
सनत्कुमारमुनये पृच्छते भक्तित: पुरा।
अनुवाद
पूर्वकाल में नारद जी ने भक्तिपूर्वक पूछने पर मुनि सनत्कुमार से जो कुछ कहा था, वह सब मैंने तुमसे कह दिया है ॥60 1/2॥
I have told you all that Narada had told the sage Sanatkumara in the past when he asked him with devotion. ॥ 60 1/2 ॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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