श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य  »  सर्ग 5: रामायण के नवाह श्रवण की विधि, महिमा तथा फल का वर्णन  »  श्लोक 56-57h
 
 
श्लोक  0.5.56-57h 
रामायणवाचकाय गावो वासांसि काञ्चनम्॥ ५६॥
रामायणपुस्तकं च दद्याद् वित्तानुसारत:।
 
 
अनुवाद
रामायण के पाठक को उसकी धन-संपत्ति के अनुसार गौ, वस्त्र, स्वर्ण और रामायण की पुस्तक आदि वस्तुएँ देनी चाहिए। 56 1/2॥
 
The reader of Ramayana should be given things like cow, clothes, gold and book of Ramayana according to his wealth. 56 1/2 ॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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