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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य
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सर्ग 5: रामायण के नवाह श्रवण की विधि, महिमा तथा फल का वर्णन
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श्लोक 49-50h
श्लोक
0.5.49-50h
रामायणपरा ये तु रामनामपरायणा:॥ ४९॥
त एव कृतकृत्याश्च घोरे कलियुगे द्विजा:।
अनुवाद
इस घोर कलियुग में जो ब्राह्मण रामायण और श्री राम नाम का आश्रय लेते हैं, वे धन्य हैं।॥49 1/2॥
In these terrible Kaliyuga, those Brahmins who take recourse to the Ramayana and the name of Shri Ram are blessed. ॥ 49 1/2 ॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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