श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य  »  सर्ग 5: रामायण के नवाह श्रवण की विधि, महिमा तथा फल का वर्णन  »  श्लोक 41-42h
 
 
श्लोक  0.5.41-42h 
वाचयेद् रामभवने पुण्यक्षेत्रे च संसदि।
ब्रह्मद्वेषरतानां च दम्भाचाररतात्मनाम्॥ ४१॥
लोकवञ्चकवृत्तीनां न ब्रूयादिदमुत्तमम्।
 
 
अनुवाद
रामायण का वर्णन भगवान राम के मंदिर में अथवा किसी पवित्र स्थान पर सत्पुरुषों की सभा में करना चाहिए। यह महान कथा उन लोगों को नहीं सुनानी चाहिए जो ब्रह्मद्रोही, पाखंडी आचरण में प्रवृत्त तथा लोगों को ठगने की प्रवृत्ति रखते हैं। ॥41 1/2॥
 
The Ramayana should be narrated in the temple of Lord Rama or in a holy place in the gathering of good men. This great story should not be narrated to those who are traitors to Brahma, are inclined towards hypocritical conduct and have the attitude of cheating people. ॥ 41 1/2 ॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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