श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य  »  सर्ग 5: रामायण के नवाह श्रवण की विधि, महिमा तथा फल का वर्णन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  0.5.2 
सनत्कुमार उवाच
रामायणस्य माहात्म्यं कथितं वै मुनीश्वर।
इदानीं श्रोतुमिच्छाम विधिं रामायणस्य च॥ २॥
 
 
अनुवाद
सनत्कुमार बोले- मुनीश्वर! आपने रामायण का माहात्म्य बताया है। अब मैं उसकी विधि सुनना चाहता हूँ।
 
Sanatkumara said— Munishwar! You have told the significance of Ramayana. Now I want to hear its method.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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