श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य  »  सर्ग 5: रामायण के नवाह श्रवण की विधि, महिमा तथा फल का वर्णन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  0.5.13 
आवाहनासनाद्यैश्च गन्धपुष्पादिभिर्व्रती।
ॐ नमो नारायणायेति पूजयेद् भक्तितत्पर:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
व्रत करने वाले को आवाहन, आसन, गंध, पुष्प आदि के द्वारा भक्तिपूर्वक ‘ॐ नमो नारायणाय’ मंत्र से पूजन करना चाहिए। 13॥
 
The fasting person should worship with devotion with the mantra ‘Om Namo Narayanay’ through invocation, posture, smell, flowers etc. 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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