vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य
»
सर्ग 5: रामायण के नवाह श्रवण की विधि, महिमा तथा फल का वर्णन
»
श्लोक 1
श्लोक
0.5.1
सूत उवाच
रामायणस्य माहात्म्यं श्रुत्वा प्रीतो मुनीश्वर:।
सनत्कुमार: पप्रच्छ नारदं मुनिसत्तमम्॥ १॥
अनुवाद
सूतजी कहते हैं- रामायण का यह माहात्म्य सुनकर ऋषि सनत्कुमार बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने पुनः महर्षि नारदजी से प्रश्न किया।
Sutji says- On hearing this greatness of Ramayana, sage Sanatkumara became very happy. He again inquired from the great sage Naradji.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd