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श्लोक 0.4.5  |
आसीत् पुरा कलियुगे कलिको नाम लुब्धक:।
परदारपरद्रव्यहरणे सततं रत:॥ ५॥ |
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| अनुवाद |
| प्राचीन कलियुग में कालिक नाम का एक शिकारी रहता था, जो सदैव दूसरों की स्त्रियों और धन का अपहरण करने में लगा रहता था ॥5॥ |
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| In the ancient Kaliyug, there lived a hunter named Kalik. He was always busy in kidnapping other's women and wealth. ॥ 5॥ |
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