श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य  »  सर्ग 4: चैत्रमास में रामायण के पठन और श्रवण का माहात्म्य, कलिक नामक व्याध और उत्तङ्क मुनि की कथा  »  श्लोक 35-36
 
 
श्लोक  0.4.35-36 
चैत्रे मासि सिते पक्षे कथा रामायणस्य च॥ ३५॥
नवाह्ना किल श्रोतव्या भक्तिभावेन सादरम्।
यस्य श्रवणमात्रेण सर्वपापै: प्रमुच्यते॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
चैत्र मास के शुक्ल पक्ष में भक्ति और आदरपूर्वक रामायण की नवाह कथा सुननी चाहिए। उसके सुनने मात्र से मनुष्य सभी पापों से मुक्त हो जाता है। 35-36॥
 
In the Shukla Paksha of Chaitra month, you should listen to the Nawah Katha of Ramayana with devotion and respect. By merely listening to him a person becomes free from all sins. 35-36॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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