श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य  »  सर्ग 4: चैत्रमास में रामायण के पठन और श्रवण का माहात्म्य, कलिक नामक व्याध और उत्तङ्क मुनि की कथा  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  0.4.16 
उत्तङ्क उवाच
भो भो: साधो वृथा मां त्वं हनिष्यसि निरागसम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
उत्तंक ने कहा - हे सज्जन! तुम मुझे व्यर्थ ही मारना चाहते हो। मैं सर्वथा निर्दोष हूँ॥16॥
 
Uttanka said - O good man! You want to kill me in vain. I am completely innocent.॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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