श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य  »  सर्ग 3: माघमास में रामायण-श्रवण का फल - राजा सुमति और सत्यवती के पूर्व जन्म का इतिहास  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  0.3.8 
रामपूजापराणां च शुश्रूषुरनहंकृति:।
पूज्येषु पूजानिरत: समदर्शी गुणान्वित:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
वे सदैव श्री रामभक्ति में तत्पर भक्तों की सेवा करते थे। उनमें अहंकार का लेशमात्र भी नहीं था। वे पूज्य पुरुषों की पूजा में सदैव तत्पर रहते थे, समदृष्टि वाले थे और सद्गुणों से युक्त थे। ॥8॥
 
He always served the devotees who were devoted to the worship of Shri Ram. There was no trace of ego in him. He was always ready to worship the revered persons, was of equal vision and was endowed with good and good qualities. ॥ 8॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd