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श्लोक 0.3.62  |
य इदं पुण्यमाख्यानं सर्वपापप्रणाशनम्।
वाचयेच्छृणुयाद् वापि रामभक्तश्च जायते॥ ६२॥ |
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| अनुवाद |
| यह पवित्र कथा समस्त पापों का नाश करने वाली है। जो कोई इसे पढ़ता या सुनता है, वह भगवान श्री राम का भक्त बन जाता है। |
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| This sacred story destroys all sins. Whoever reads or listens to it becomes a devotee of Lord Shri Ram. 62. |
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इति श्रीस्कन्दपुराणे उत्तरखण्डे नारदसनत्कुमारसंवादे रामायणमाहात्म्ये माघफलानुकीर्तनं नाम तृतीयोऽध्याय:॥ ३॥
इस प्रकार श्रीस्कन्दपुराणके उत्तरखण्डमें नारदसनत्कुमारसंवादके अन्तर्गत रामायणमाहात्म्यके प्रसंगमें माघमासमें रामायणकथाश्रवणके फलका वर्णन नामक तीसरा अध्याय पूरा हुआ॥ ३॥ |
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