श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य  »  सर्ग 3: माघमास में रामायण-श्रवण का फल - राजा सुमति और सत्यवती के पूर्व जन्म का इतिहास  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  0.3.61 
माघे मासे सिते पक्षे रामायणं प्रयत्नत:।
नवाह्ना किल श्रोतव्यं सर्वधर्मफलप्रदम्॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
माघ मास के शुक्ल पक्ष में बड़े यत्न से रामायण की नवाह्न कथा सुननी चाहिए। इससे सभी धार्मिक कर्मों का फल मिलता है ॥ 61॥
 
In the bright half of the month of Magha one should listen to the Navahan Katha of the Ramayana with great effort. It gives the fruits of all the religious deeds. ॥ 61॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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