श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य  »  सर्ग 3: माघमास में रामायण-श्रवण का फल - राजा सुमति और सत्यवती के पूर्व जन्म का इतिहास  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  0.3.52 
आरोप्य मां विमाने तु जग्मुस्ते च परं पदम्।
आवां समीपमापन्नौ देवदेवस्य चक्रिण:॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
वे दूत हम दोनों को विमान में बिठाकर भगवान् के उत्तम धाम ले गए। हम दोनों परम भगवान् चक्रपाणि के पास पहुँचे॥ 52॥
 
Those messengers seated us both in a plane and took us to the supreme abode of God (uttam dham). We both reached near the supreme God Chakrapani*॥ 52॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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