श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य  »  सर्ग 3: माघमास में रामायण-श्रवण का फल - राजा सुमति और सत्यवती के पूर्व जन्म का इतिहास  »  श्लोक 38-39
 
 
श्लोक  0.3.38-39 
अथेयमागता साध्वी विन्ध्यदेशसमुद्भवा॥ ३८॥
निषादकुलसम्भूता नाम्ना कालीति विश्रुता।
बन्धुवर्गै: परित्यक्ता दु:खिता जीर्णविग्रहा॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात मेरी यह पतिव्रता पत्नी मेरे पास आई। पूर्वजन्म में इसका नाम काली था। काली निषाद वंश की कन्या थी और विंध्य प्रदेश में उत्पन्न हुई थी। उसके भाई-बंधुओं ने उसे त्याग दिया था। वह दुःख से पीड़ित थी। उसका शरीर वृद्ध हो गया था।
 
Thereafter this pious wife of mine came to me. In her previous life her name was Kali. Kali was the daughter of the Nishad clan and was born in Vindhya Pradesh. Her brothers and relatives had abandoned her. She was suffering from sorrow. Her body had become old.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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