श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य  »  सर्ग 3: माघमास में रामायण-श्रवण का फल - राजा सुमति और सत्यवती के पूर्व जन्म का इतिहास  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  0.3.1 
सनत्कुमार उवाच
अहो विप्र इदं प्रोक्तमितिहासं च नारद।
रामायणस्य माहात्म्यं त्वं पुनर्वद विस्तरात्॥ १॥
 
 
अनुवाद
सनत्कुमार बोले- हे नारद मुनि! आपने यह अद्भुत कथा कही है। अब कृपया पुनः विस्तारपूर्वक रामायण का माहात्म्य बताइए।॥1॥
 
Sanatkumara said— O sage Narada! You have narrated this wonderful story. Now please describe the significance of Ramayana in detail again.॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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