Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 0.2.64-65h: श्री रामचन्द्रजी के ध्यान में लीन मनुष्यों का कौन अनिष्ट कर सकता है? जहाँ भी श्री राम का भक्त होता है, वहाँ ब्रह्मा, विष्णु और शिव भी विद्यमान रहते हैं। वहाँ देवता, सिद्ध और रामायण की शरण में आए हुए मनुष्य भी रहते हैं। | ramayan सर्ग 0.2: नारद सनत्कुमार-संवाद, सुदास या सोमदत्त नामक ब्राह्मण को राक्षसत्व की प्राप्ति तथा रामायण-कथा-श्रवण द्वारा उससे उद्धार । ramayan काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्री रामचन्द्रजी के ध्यान में लीन मनुष्यों का कौन अनिष्ट कर सकता है? जहाँ भी श्री राम का भक्त होता है, वहाँ ब्रह्मा, विष्णु और शिव भी विद्यमान रहते हैं। वहाँ देवता, सिद्ध और रामायण की शरण में आए हुए मनुष्य भी रहते हैं।
Who can be capable of harming the people who are devoted to the meditation of Shri Ramchandraji? Wherever there is a devotee of Shri Ram, Brahma, Vishnu and Shiva are present there. There are also gods, Siddhas and people who take refuge in Ramayana. 64 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥