श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य  »  सर्ग 2: नारद सनत्कुमार-संवाद, सुदास या सोमदत्त नामक ब्राह्मण को राक्षसत्व की प्राप्ति तथा रामायण-कथा-श्रवण द्वारा उससे उद्धार  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  0.2.6 
एकदा ब्रह्मण: पुत्रा: सनकाद्या महौजस:।
मेरुशृंगे समाजग्मुर्वीक्षितुं ब्रह्मण: सभाम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
एक दिन वे महाब्रह्मपुत्र सनकादि ब्रह्माजी की सभा देखने के लिए मेरु पर्वत के शिखर पर गए ॥6॥
 
One day he went to the peak of Mount Meru to see the meeting of the great Brahmaputra Sankadi Brahmaji. 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)