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ramayan 0.2.58-59h: ऐसा कहकर गुरु ने पुनः ये सुन्दर एवं मंगलमय वचन कहे - 'रामायण की अमृतमय कथा नौ दिन तक सुननी चाहिए।'   |   ramayan सर्ग 0.2: नारद सनत्कुमार-संवाद, सुदास या सोमदत्त नामक ब्राह्मण को राक्षसत्व की प्राप्ति तथा रामायण-कथा-श्रवण द्वारा उससे उद्धार   ।   ramayan काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य  »  सर्ग 2: नारद सनत्कुमार-संवाद, सुदास या सोमदत्त नामक ब्राह्मण को राक्षसत्व की प्राप्ति तथा रामायण-कथा-श्रवण द्वारा उससे उद्धार  »  श्लोक 58-59h
 
 
श्लोक  0.2.58-59h 
गुरुणापि पुन: प्रोक्तं रम्यं तु शुभदं वच:॥ ५८॥
नवाह्ना खलु श्रोतव्यं रामायणकथामृतम्।
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर गुरु ने पुनः ये सुन्दर एवं मंगलमय वचन कहे - 'रामायण की अमृतमय कथा नौ दिन तक सुननी चाहिए।'
 
Having said this, the Guru once again said these beautiful and auspicious words - 'The nectar-like story of the Ramayana should be heard over a period of nine days.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)