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ramayan 0.2.56-57h: हे महामुनि! मैंने पहले अपने गुरु की अवहेलना की थी। तब गुरु ने मुझ पर कृपा करते हुए यह कहा। 56 1/2   |   ramayan सर्ग 0.2: नारद सनत्कुमार-संवाद, सुदास या सोमदत्त नामक ब्राह्मण को राक्षसत्व की प्राप्ति तथा रामायण-कथा-श्रवण द्वारा उससे उद्धार   ।   ramayan काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य  »  सर्ग 2: नारद सनत्कुमार-संवाद, सुदास या सोमदत्त नामक ब्राह्मण को राक्षसत्व की प्राप्ति तथा रामायण-कथा-श्रवण द्वारा उससे उद्धार  »  श्लोक 56-57h
 
 
श्लोक  0.2.56-57h 
गुर्ववज्ञा मया पूर्वं कृता च मुनिसत्तम॥ ५६॥
कृतश्चानुग्रह: पश्चाद् गुरुणोक्तमिदं वच:।
 
 
अनुवाद
हे महामुनि! मैंने पहले अपने गुरु की अवहेलना की थी। तब गुरु ने मुझ पर कृपा करते हुए यह कहा। 56 1/2
 
Great sage! I had disregarded my Guru in the past. Then the Guru showered his blessings on me and said this. 56 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)