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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य  »  सर्ग 2: नारद सनत्कुमार-संवाद, सुदास या सोमदत्त नामक ब्राह्मण को राक्षसत्व की प्राप्ति तथा रामायण-कथा-श्रवण द्वारा उससे उद्धार  »  श्लोक 47-48h
 
 
श्लोक  0.2.47-48h 
तत्रापि कृतवान् नित्यं नरमांसाशनं तदा॥ ४७॥
जगाम नर्मदातीरे सर्वलोकभयंकर:।
 
 
अनुवाद
वहाँ भी वह प्रतिदिन मानव मांस खाता रहा। समस्त लोकों के हृदय में भय उत्पन्न करने वाला वह राक्षस भटकता हुआ नर्मदा नदी के तट पर पहुँचा।
 
There also he continued to eat human flesh every day. That demon who caused fear in the hearts of all the worlds, wandered and reached the banks of river Narmada. 47 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)