Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 0.2.33-34h: परम बुद्धिमान गौतम ज्ञान के भण्डार थे, वे अपने शिष्य के व्यवहार से क्रोधित नहीं हुए, अपितु शान्त रहे। वे यह जानकर प्रसन्न हुए कि मेरा शिष्य सौदास शास्त्रविहित कर्मकाण्ड करता है। 33 1/2॥   |   ramayan सर्ग 0.2: नारद सनत्कुमार-संवाद, सुदास या सोमदत्त नामक ब्राह्मण को राक्षसत्व की प्राप्ति तथा रामायण-कथा-श्रवण द्वारा उससे उद्धार   ।   ramayan काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य  »  सर्ग 2: नारद सनत्कुमार-संवाद, सुदास या सोमदत्त नामक ब्राह्मण को राक्षसत्व की प्राप्ति तथा रामायण-कथा-श्रवण द्वारा उससे उद्धार  »  श्लोक 33-34h
 
 
श्लोक  0.2.33-34h 
स तु शान्तो महाबुद्धिर्गौतमस्तेजसां निधि:॥ ३३॥
शास्त्रोदितानि कर्माणि करोति स मुदं ययौ।
 
 
अनुवाद
परम बुद्धिमान गौतम ज्ञान के भण्डार थे, वे अपने शिष्य के व्यवहार से क्रोधित नहीं हुए, अपितु शान्त रहे। वे यह जानकर प्रसन्न हुए कि मेरा शिष्य सौदास शास्त्रविहित कर्मकाण्ड करता है। 33 1/2॥
 
The highly intelligent Gautam was the treasure of knowledge, he did not get angry with the behavior of his disciple but remained calm. He was happy to know that my disciple Saudas performs the rituals prescribed in the scriptures. 33 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)