श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य  »  सर्ग 2: नारद सनत्कुमार-संवाद, सुदास या सोमदत्त नामक ब्राह्मण को राक्षसत्व की प्राप्ति तथा रामायण-कथा-श्रवण द्वारा उससे उद्धार  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  0.2.3 
सूत उवाच
सनकाद्या महात्मानो ब्रह्मणस्तनया: स्मृता:।
निर्ममा निरहंकारा: सर्वे ते ह्यूर्ध्वरेतस:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
सूतजी बोले - ॠषियों! सनकादि महात्मा ब्रह्माजी के पुत्र माने जाते हैं। उनमें ममता या अहंकार का लेशमात्र भी नहीं है। वे सभी ऊर्ध्वरेता (अधर्मी ब्रह्मचारी) हैं। 3॥
 
Sutji said – Sages! Sankadi Mahatma is considered to be the son of Lord Brahma. There is no trace of affection or ego in them. All of them are Urdhvareta (non secular celibates). 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)