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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य  »  सर्ग 2: नारद सनत्कुमार-संवाद, सुदास या सोमदत्त नामक ब्राह्मण को राक्षसत्व की प्राप्ति तथा रामायण-कथा-श्रवण द्वारा उससे उद्धार  »  श्लोक 29-30h
 
 
श्लोक  0.2.29-30h 
आस्ते कृतयुगे विप्रो धर्मकर्मविशारद:॥ २९॥
सोमदत्त इति ख्यातो नाम्ना धर्मपरायण:।
 
 
अनुवाद
सत्ययुग में एक ब्राह्मण था जो धर्म और कर्म का विशेष ज्ञाता था। उसका नाम सोमदत्त था। वह सदैव धर्म का पालन करने में तत्पर रहता था।
 
There was a Brahmin in Satyayuga who had special knowledge of Dharma and Karma. His name was Somdatta. He was always ready to follow Dharma. 29 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)