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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य  »  सर्ग 2: नारद सनत्कुमार-संवाद, सुदास या सोमदत्त नामक ब्राह्मण को राक्षसत्व की प्राप्ति तथा रामायण-कथा-श्रवण द्वारा उससे उद्धार  »  श्लोक 27-28h
 
 
श्लोक  0.2.27-28h 
अनुग्राह्योऽस्मि यदि ते तत्त्वतो वक्तुमर्हसि।
सर्वमेतदशेषेण मुने नो वक्तुमर्हसि॥ २७॥
शृण्वतां वदतां चैव कथा पापविनाशिनी।
 
 
अनुवाद
मुनि! यदि आप हम पर कृपा करते हैं, तो हमें सब बातें विस्तारपूर्वक बताइए। हमें इन सब बातों से अवगत कराइए; क्योंकि भगवान की कथा वक्ता और श्रोता दोनों के पापों का नाश करने वाली है। 27 1/2॥
 
Muni! If you are kind to us, then tell us everything in detail. Make us aware of all these things; because the story of God destroys the sins of both the speaker and the listener. 27 1/2 ॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)