Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 0.2.21-22h: मेरे जैसा तुच्छ बुद्धि वाला मनुष्य उस परमेश्वर की स्तुति कैसे कर सकता है जिसका नाम स्मरण मात्र से बड़े-बड़े पापी भी पवित्र हो जाते हैं? ॥ 21 1/2॥ | ramayan सर्ग 0.2: नारद सनत्कुमार-संवाद, सुदास या सोमदत्त नामक ब्राह्मण को राक्षसत्व की प्राप्ति तथा रामायण-कथा-श्रवण द्वारा उससे उद्धार । ramayan काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यन्नाम्न: स्मरणेनापि महापातकिनोऽपि ये॥ २१॥
पावनत्वं प्रपद्यन्ते कथं स्तोष्यामि क्षुल्लधी:।
अनुवाद
मेरे जैसा तुच्छ बुद्धि वाला मनुष्य उस परमेश्वर की स्तुति कैसे कर सकता है जिसका नाम स्मरण मात्र से बड़े-बड़े पापी भी पवित्र हो जाते हैं? ॥ 21 1/2॥
How can a person with a lowly intellect like me praise the Supreme Being whose name purifies even the biggest sinners by merely remembering Him? ॥ 21 1/2 ॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥