Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 0.2.16-17h: उन परम पुरुष को नमस्कार है, जिनका स्वभाव ही ज्ञान और अज्ञान, धर्म और अधर्म, विद्या और अज्ञान है, तथा जो सबकी आत्मा हैं। ॥16 1/2॥ | ramayan सर्ग 0.2: नारद सनत्कुमार-संवाद, सुदास या सोमदत्त नामक ब्राह्मण को राक्षसत्व की प्राप्ति तथा रामायण-कथा-श्रवण द्वारा उससे उद्धार । ramayan काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ज्ञानाज्ञानस्वरूपाय धर्माधर्मस्वरूपिणे॥ १६॥
विद्याविद्यास्वरूपाय स्वस्वरूपाय ते नम:।
अनुवाद
उन परम पुरुष को नमस्कार है, जिनका स्वभाव ही ज्ञान और अज्ञान, धर्म और अधर्म, विद्या और अज्ञान है, तथा जो सबकी आत्मा हैं। ॥16 1/2॥
Salutations to that Supreme Being, Whose very nature is knowledge and ignorance, Dharma and Adharma, learning and ignorance, and Who is the soul of all. ॥16 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥