vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य
»
सर्ग 1: कलियुग की स्थिति, कलिकाल के मनुष्यों के उद्धार का उपाय, रामायणपाठ, उसकी महिमा, उसके श्रवण के लिये उत्तम काल आदि का वर्णन
»
श्लोक 38-39h
श्लोक
0.1.38-39h
तावत्पापानि देहेऽस्मिन् निवसन्ति तपोधना:॥ ३८॥
यावन्न श्रूयते सम्यक् श्रीमद्रामायणं नरै:।
अनुवाद
तपोधनो! इस शरीर में पाप तभी तक रहते हैं, जब तक मनुष्य श्री रामायण कथा का विधिपूर्वक श्रवण नहीं करता।
Tapodhano! Sins remain in this body only until a person listens to Shri Ramayana Katha properly.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×