श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य  »  सर्ग 1: कलियुग की स्थिति, कलिकाल के मनुष्यों के उद्धार का उपाय, रामायणपाठ, उसकी महिमा, उसके श्रवण के लिये उत्तम काल आदि का वर्णन  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  0.1.34 
चैत्रे माघे कार्तिके च सिते पक्षे च वाचयेत्।
नवाहस्सु महापुण्यं श्रोतव्यं च प्रयत्नत:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
चैत्र, माघ और कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष में नौ दिन तक परम पवित्र रामायण कथा का यत्नपूर्वक पाठ और श्रवण करना चाहिए॥ 34॥
 
In the bright half of the months of Chaitra, Magha and Kartik the most sacred Ramayana story should be recited and heard diligently for nine days.॥ 34॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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