श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य  »  सर्ग 1: कलियुग की स्थिति, कलिकाल के मनुष्यों के उद्धार का उपाय, रामायणपाठ, उसकी महिमा, उसके श्रवण के लिये उत्तम काल आदि का वर्णन  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  0.1.31 
ऊर्जे माघे सिते पक्षे चैत्रे च द्विजसत्तमा:।
नवाह्ना खलु श्रोतव्यं रामायणकथामृतम्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
हे ब्राह्मणों! कार्तिक, माघ और चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नौ-नौ तिथियों में रामायण की अमृतमयी कथा का श्रवण करना चाहिए।
 
O Brahmins! One should listen to the nectar-like story of the Ramayana during the nine days of the bright half of the month of Kartik, Magh and Chaitra.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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