श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य  »  सर्ग 1: कलियुग की स्थिति, कलिकाल के मनुष्यों के उद्धार का उपाय, रामायणपाठ, उसकी महिमा, उसके श्रवण के लिये उत्तम काल आदि का वर्णन  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  0.1.20 
दु:स्वप्ननाशनं धन्यं भुक्तिमुक्तिफलप्रदम्।
रामचन्द्रकथोपेतं सर्वकल्याणसिद्धिदम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
वह समस्त दुःस्वप्नों का नाश करने वाला है। वह स्तुति के योग्य है और भोग तथा मोक्षरूपी फल प्रदान करने वाला है। उसमें भगवान श्री रामचंद्रजी की कथा का वर्णन है। वह काव्य अपने पाठकों और श्रोताओं को सभी कल्याणकारी सिद्धियाँ देने वाला है। 20॥
 
It destroys all nightmares. He is worthy of thanks and provides fruits of enjoyment and salvation. It contains the description of the story of Lord Shri Ramchandraji. That poetry is going to give all the beneficial achievements to its readers and listeners. 20॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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