श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य  »  सर्ग 1: कलियुग की स्थिति, कलिकाल के मनुष्यों के उद्धार का उपाय, रामायणपाठ, उसकी महिमा, उसके श्रवण के लिये उत्तम काल आदि का वर्णन  »  श्लोक 18-19
 
 
श्लोक  0.1.18-19 
सूत उवाच
शृणुध्वमृषय: सर्वे यदिष्टं वो वदाम्यहम्।
गीतं सनत्कुमाराय नारदेन महात्मना॥ १८॥
रामायणं महाकाव्यं सर्ववेदेषु सम्मतम्।
सर्वपापप्रशमनं दुष्टग्रहनिवारणम्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
सूतजी बोले - हे ऋषियों! आप सब लोग सुनें। मैं आपको वह सब सुनाता हूँ जो आप सुनना चाहते हैं। महात्मा नारदजी ने सनत्कुमार को जो महाकाव्य रामायण सुनाया था, वह समस्त पापों का नाश करने और पाप ग्रहों के कारण उत्पन्न बाधाओं को दूर करने में समर्थ है। वह समस्त वेदों के अर्थों के अनुकूल है। ॥18-19॥
 
Sutji said - O sages! All of you listen. I will tell you what you want to hear. The epic Ramayana which Mahatma Naradji recited to Sanatkumara is capable of destroying all sins and removing the obstacles caused by evil planets. It is in accordance with the meanings of all the Vedas. ॥18-19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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