| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 0: श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण माहात्म्य » सर्ग 1: कलियुग की स्थिति, कलिकाल के मनुष्यों के उद्धार का उपाय, रामायणपाठ, उसकी महिमा, उसके श्रवण के लिये उत्तम काल आदि का वर्णन » श्लोक 1 |
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| | | | श्लोक 0.1.1  | श्रीराम: शरणं समस्तजगतां
रामं विना का गती
रामेण प्रतिहन्यते कलिमलं
रामाय कार्यं नम:।
रामात् त्रस्यति कालभीमभुजगो
रामस्य सर्वं वशे
रामे भक्तिरखण्डिता भवतु मे
राम त्वमेवाश्रय:*॥ १॥ | | | | | | अनुवाद | | श्री रामचंद्रजी सम्पूर्ण जगत के आश्रय हैं। श्री राम के बिना और कौन-सा मार्ग है? श्री राम कलियुग के समस्त दुष्टों का नाश करते हैं; इसलिए हमें श्री रामचंद्रजी को प्रणाम करना चाहिए। मृत्यु रूपी भयंकर सर्प भी श्री राम से भयभीत है। संसार की प्रत्येक वस्तु भगवान श्री राम के अधीन है। श्री राम के प्रति मेरी अखंड भक्ति बनी रहे। हे राम! आप ही मेरे आधार हैं॥1॥ | | | | Shri Ramchandraji is the refuge of the entire world. What other path is there without Shri Ram? Shri Ram destroys all the evils of Kaliyug; therefore, we should salute Shri Ramchandraji. Even the dreadful serpent in the form of death is afraid of Shri Ram. Everything in the world is in the control of Lord Shri Ram. May my unbroken devotion towards Shri Ram remain. O Ram! You are my support.॥1॥ | | ✨ ai-generated | | |
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