श्री रामचरितमानस  »  काण्ड 7: उत्तर काण्ड  »  दोहा 26
 
 
काण्ड 7 - दोहा 26 
अवधपुरी बासिन्ह कर सुख संपदा समाज।
सहस सेष नहिं कहि सकहिं जहँ नृप राम बिराज॥26॥
 
अनुवाद
 
 जहाँ स्वयं भगवान श्री रामचन्द्र राजा के रूप में निवास करते हैं, वहाँ के निवासियों के धन और सुख का वर्णन हजारों शेषजी भी नहीं कर सकते।
 
Even thousands of Sheshjis cannot describe the wealth and happiness of the residents of Awadhpuri, where Lord Shri Ramchandra himself resides as the king.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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