श्री रामचरितमानस  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  चौपाई 2.2
 
 
काण्ड 4 - चौपाई 2.2 
इहाँ हरी निसिचर बैदेही। बिप्र फिरहिं हम खोजत तेही॥
आपन चरित कहा हम गाई। कहहु बिप्र निज कथा बुझाई॥2॥
 
अनुवाद
 
 यहाँ (जंगल में) राक्षस ने (मेरी पत्नी) जानकी का हरण कर लिया है। हे ब्राह्मण! मैं उसे ढूँढ़ रहा हूँ। मैंने तुम्हें अपनी कथा सुना दी है। अब हे ब्राह्मण! तुम अपनी कथा मुझे समझाओ।
 
Here (in the forest) the demon has abducted (my wife) Janaki. O Brahmin! I am searching for her. I have told you my story. Now, O Brahmin! Explain your story to me.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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