| श्री रामचरितमानस » काण्ड 2: अयोध्या काण्ड » सोरठा 276 |
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| | | | काण्ड 2 - सोरठा 276  | किए अमित उपदेस जहँ तहँ लोगन्ह मुनिबरन्ह।
धीरजु धरिअ नरेस कहेउ बसिष्ठ बिदेह सन॥276॥ | | | | अनुवाद | | | | सर्वत्र महर्षियों ने लोगों को अनंत उपदेश दिये और वशिष्ठ जी ने विदेह (जनक) से कहा - हे राजन! धैर्य रखो। | | | | Everywhere, the great sages gave infinite advice to the people and Vasishtha said to Videha (Janaka) - O King! Please have patience. | |
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