| श्री रामचरितमानस » काण्ड 2: अयोध्या काण्ड » दोहा 240 |
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| | | | काण्ड 2 - दोहा 240  | बरबस लिए उठाइ उर लाए कृपानिधान।
भरत राम की मिलनि लखि बिसरे सबहि अपान॥240॥ | | | | अनुवाद | | | | दयालु श्री राम ने उन्हें बलपूर्वक उठाकर हृदय से लगा लिया! भरत और श्री राम का मिलन जिस प्रकार हुआ, उसे देखकर सभी अपनी सुध-बुध भूल गए। | | | | The merciful Shri Ram picked him up forcefully and embraced him! Seeing the way Bharata and Shri Ram met, everyone forgot their own senses. | |
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