| श्री रामचरितमानस » काण्ड 2: अयोध्या काण्ड » दोहा 10 |
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| | | | काण्ड 2 - दोहा 10  | तेहि अवसर आए लखन मगन प्रेम आनंद।
सनमाने प्रिय बचन कहि रघुकुल कैरव चंद॥10॥ | | | | अनुवाद | | | | उस समय प्रेम और आनंद में मग्न लक्ष्मणजी वहाँ पहुँचे। रघुकुल के कमल को खिलने वाले चन्द्रमा श्री रामचन्द्रजी ने मधुर वचन कहकर उनका सत्कार किया। | | | | At that time, Lakshmanaji, immersed in love and bliss, arrived. Shri Ramchandraji, the moon that makes the lotus of the Raghukul blossom, honoured him by saying sweet words. | |
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