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mahabharat 9.8.8-9: ‘हममें से कोई भी योद्धा पाण्डवों के साथ अकेले युद्ध न करे। जो कोई पाण्डवों के साथ अकेले युद्ध करेगा अथवा पाण्डवों के साथ लड़ने वाले योद्धा को अकेला छोड़ देगा, वह पाँच पापों और उपपापों से भर जाएगा॥ 8-9॥   |   mahabharat अध्याय 9.8: उभयपक्षकी सेनाओंका समरांगणमें उपस्थित होना एवं बची हुई दोनों सेनाओंकी संख्याका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 8: उभयपक्षकी सेनाओंका समरांगणमें उपस्थित होना एवं बची हुई दोनों सेनाओंकी संख्याका वर्णन  »  श्लोक 8-9
 
 
श्लोक  9.8.8-9 
न न एकेन योद्धव्यं कथञ्चिदपि पाण्डवै:॥ ८॥
यो ह्येक: पाण्डवैर्युध्येद् यो वा युध्यन्तमुत्सृजेत्।
स पञ्चभिर्भवेद् युक्त: पातकैश्चोपपातकै:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
‘हममें से कोई भी योद्धा पाण्डवों के साथ अकेले युद्ध न करे। जो कोई पाण्डवों के साथ अकेले युद्ध करेगा अथवा पाण्डवों के साथ लड़ने वाले योद्धा को अकेला छोड़ देगा, वह पाँच पापों और उपपापों से भर जाएगा॥ 8-9॥
 
‘No warrior amongst us should fight alone with the Pandavas. Anyone who fights alone with the Pandavas or leaves a warrior fighting with the Pandavas alone will be filled with five sins and sub-sins.॥ 8-9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)