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mahabharat 9.8.42-43h: हे भरतश्रेष्ठ! ये ही सैनिक युद्ध के लिए आगे आए थे। हे राजन! इस प्रकार सेना को विभाजित करके, क्रोध और विजय की इच्छा से भरे हुए आपके सैनिकों ने मद्रराज शल्य के नेतृत्व में पाण्डवों पर आक्रमण किया।   |   mahabharat अध्याय 9.8: उभयपक्षकी सेनाओंका समरांगणमें उपस्थित होना एवं बची हुई दोनों सेनाओंकी संख्याका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 8: उभयपक्षकी सेनाओंका समरांगणमें उपस्थित होना एवं बची हुई दोनों सेनाओंकी संख्याका वर्णन  »  श्लोक 42-43h
 
 
श्लोक  9.8.42-43h 
एत एव समाजग्मुर्युद्धाय भरतर्षभ।
एवं विभज्य राजेन्द्र मद्रराजवशे स्थिता:॥ ४२॥
पाण्डवान् प्रत्युदीयुस्ते जयगृद्धा: प्रमन्यव:।
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! ये ही सैनिक युद्ध के लिए आगे आए थे। हे राजन! इस प्रकार सेना को विभाजित करके, क्रोध और विजय की इच्छा से भरे हुए आपके सैनिकों ने मद्रराज शल्य के नेतृत्व में पाण्डवों पर आक्रमण किया।
 
O best of the Bharatas! These very soldiers had come forward for the battle. O King! Having divided the army in this manner, your soldiers, filled with anger and the desire for victory, under the command of the Madra king Shalya, attacked the Pandavas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)