श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 7: राजा शल्यके वीरोचित उद्‍गार तथा श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको शल्यवधके लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  9.7.40 
द्रोणभीष्मार्णवं तीर्त्वा कर्णपातालसम्भवम्।
मा निमज्जस्व सगण: शल्यमासाद्य गोष्पदम्॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
‘भीष्म, द्रोण और कर्ण समुद्र को पार करके अपने सेवकों सहित शल्य नामक गानरूपी खाई में न डूबें॥40॥
 
‘After crossing the ocean of Bhishma, Drona and Karna you along with your servants should not drown in the ditch of singing called Shalya.॥ 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)