श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 7: राजा शल्यके वीरोचित उद्‍गार तथा श्रीकृष्णका युधिष्ठिरको शल्यवधके लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  9.7.33 
तस्याद्य न प्रपश्यामि प्रतियोद्धारमाहवे।
त्वामृते पुरुषव्याघ्र शार्दूलसमविक्रमम्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
पुरुषसिंह! तुम्हारा पराक्रम सिंह के समान है। आज युद्धभूमि में मुझे तुम्हारे अतिरिक्त कोई ऐसा दिखाई नहीं दे रहा जो शल्य से युद्ध कर सके।
 
Purushasingh! Your valour is like that of a lion. Today I do not see anyone other than you on the battlefield who can fight against Shalya.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)