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संजय उवाच
अभिषिक्ते तथा शल्ये तव सैन्येषु मानद।
न कर्णव्यसनं किंचिन्मेनिरे तत्र भारत॥ २१॥
अनुवाद
संजय ने कहा - हे पूज्यवर! भरतपुत्र! शल्य के आपकी सेना का राजा बनने के बाद, कर्ण की मृत्यु पर किसी भी योद्धा को किंचित मात्र भी दुःख नहीं हुआ।
Sanjaya said - O honourable one! Son of Bharata! After Shalya was anointed as the king of your army, none of the warriors felt even a little sorrow over the death of Karna.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥