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श्लोक  9.65.9 
भ्रुकुटीकृतवक्त्रान्तं क्रोधादुद्‍वृत्तचक्षुषम्।
सामर्षं तं नरव्याघ्रं व्याघ्रं निपतितं यथा॥ ९॥
 
 
अनुवाद
उसकी भौंहें सिकुड़ी हुई थीं, उसकी आंखें क्रोध से लाल थीं, और एक गिरे हुए बाघ की तरह, वह महानतम मनुष्य आक्रोश से भरा हुआ प्रतीत हो रहा था।
 
His eyebrows were drawn together, his eyes were red with rage, and like a fallen tiger, that greatest of men appeared filled with resentment.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)